सिर्फ छत नहीं, पूरी गाड़ी होगी सोलर पैनल! VIPV टेक्नोलॉजी से बदलेगा EV की दुनिया का फ्यूचर

Durgesh Paptwan
Durgesh Paptwan | July 14, 2025

आज जब इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) का दौर तेजी से बढ़ रहा है, वहीं सोलर एनर्जी के उपयोग को लेकर भी नए-नए प्रयोग हो रहे हैं। अब तक EV गाड़ियों में सोलर पैनल सिर्फ छत पर लगाए जाते थे ताकि कुछ हद तक बैटरी चार्जिंग की जा सके, लेकिन अब एक नई टेक्नोलॉजी सामने आई है जिसे कहते हैं VIPV यानि Vehicle Integrated Photovoltaics। इस तकनीक के तहत गाड़ी की पूरी बॉडी को ही सोलर पावर जनरेटर में बदल दिया जाएगा। सिर्फ छत नहीं, बल्कि बोनट, साइड पैनल और यहां तक कि कार का पूरा बाहरी ढांचा ही बिजली पैदा करने वाला सिस्टम बन जाएगा। यह टेक्नोलॉजी EV की दुनिया में एक बड़ा बदलाव लाने वाली है।

Vehicle with VIPV technology

IIT-मद्रास की कार ‘आग्नेय’ दौड़ेगी सोलर रेस में

25 से 31 अगस्त के बीच ऑस्ट्रेलिया में होने वाली ‘Bridgestone World Solar Challenge’ एक खास रेस है, जिसमें सिर्फ सोलर से चलने वाली कारें भाग लेती हैं। इस बार इस रेस में भारत भी पहली बार शामिल होने जा रहा है। IIT मद्रास के छात्रों ने ‘Centre for Innovation’ के तहत ‘आग्नेय’ नाम की एक सोलर कार तैयार की है जो एडिलेड से लेकर पोर्ट डार्विन तक 3,000 किलोमीटर का सफर तय करेगी। यह रेस खास इसीलिए भी है क्योंकि यह ऑस्ट्रेलिया की सर्दियों में आयोजित होती है जब सूरज की रोशनी बहुत सीमित होती है। इस चुनौतीपूर्ण माहौल में भारत की सोलर कार प्रदर्शन करेगी और दिखाएगी कि VIPV टेक्नोलॉजी किस हद तक कारगर हो सकती है।

क्या कहती है रिसर्च और कौन-कौन सी कंपनियां जुड़ी हैं

Vellore Institute of Technology (VIT) के प्रोफेसर वाई राजा शेखर और उनकी टीम ने इस टेक्नोलॉजी पर रिसर्च की है और यह पाया कि एक VIPV कार एक दिन में 1,200 से 1,800 Whr तक की बिजली जेनरेट कर सकती है। इस बिजली का उपयोग कार के एसी, लाइट्स जैसे सहायक सिस्टम्स के लिए किया जा सकता है जिससे बैटरी पर कम दबाव पड़ेगा। विश्वभर की कई कंपनियां जैसे Fraunhofer Institute (Germany), Sono Motors, Lightyear, Toyota और Mercedes इस तकनीक पर तेज़ी से काम कर रही हैं। Mercedes ने तो दिसंबर 2024 में एक ‘सोलर पेंट’ लॉन्च किया है जो कार की बॉडी पर लगाकर साल में लगभग 12,000 किलोमीटर अतिरिक्त रेंज हासिल की जा सकती है। यह टेक्नोलॉजी EV रेंज को बढ़ाने के साथ-साथ चार्जिंग डिपेंडेंसी को भी कम करेगी।

तकनीक के सामने चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं

हालांकि VIPV टेक्नोलॉजी में काफी संभावनाएं हैं लेकिन इसके सामने कई तकनीकी चुनौतियां भी हैं। जैसे ज्यादा तापमान में सोलर मॉड्यूल्स की एफिशिएंसी कम हो जाना। इसे हल करने के लिए शोधकर्ता एक्टिव और पैसिव कूलिंग तकनीकों पर काम कर रहे हैं जिनमें फेज-चेंजिंग कैमिकल्स का भी उपयोग शामिल है। इसके अलावा गाड़ियों का वजन बढ़ने की समस्या भी ध्यान देने योग्य है, क्योंकि VIPV सिस्टम के साथ अतिरिक्त इंस्ट्रूमेंटेशन की जरूरत पड़ती है। लेकिन इन सभी बाधाओं के बावजूद, यह टेक्नोलॉजी EV इंडस्ट्री के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। आने वाले वर्षों में VIPV के जरिए हम ऐसे EV देख सकते हैं जो खुद ही चार्ज होते रहें न केवल छत से, बल्कि पूरी बॉडी से सूरज की किरणें पकड़कर बिजली बनाएं और सफर को ज्यादा स्मार्ट और सस्टेनेबल बनाएं।

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