चीन बना सोलर और विंड एनर्जी का सुपरपावर! अकेले कर रहा 74% प्रोजेक्ट्स का निर्माण, पढ़े पूरी खबर 

Durgesh Paptwan
Durgesh Paptwan | July 14, 2025

ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर (GEM) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चीन आज दुनिया में सबसे बड़ा सोलर और विंड एनर्जी हब बनकर उभरा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस समय दुनिया भर में जितने भी यूटिलिटी-स्केल सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स का निर्माण हो रहा है, उनमें से लगभग 74% प्रोजेक्ट्स अकेले चीन में चल रहे हैं। चीन इस समय 510 गीगावॉट (GW) की निर्माणाधीन क्षमता पर काम कर रहा है और कुल मिलाकर 1302 GW यानी 1.3 टेरावॉट से अधिक की प्रोजेक्ट पाइपलाइन है जो किसी भी अन्य देश की तुलना में कहीं अधिक है। यह चीन को न केवल ऊर्जा उत्पादन में अग्रणी बनाता है बल्कि ग्रीन एनर्जी में दुनिया का नेतृत्व करने वाली ताकत भी बना देता है।

China becomes solar and wind superpower

2025 की शुरुआत तक चीन की कुल ऑपरेशनल सोलर और विंड क्षमता 1.4 टेरावॉट तक पहुंच चुकी है जो पूरी दुनिया की 44% क्षमता के बराबर है। खास बात यह है कि इस साल की पहली तिमाही में चीन ने थर्मल पावर को पीछे छोड़ते हुए अपनी 22.5% बिजली जरूरतें सोलर और विंड एनर्जी से पूरी की हैं। यह पहली बार है जब नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों ने कोयले पर आधारित बिजली को पीछे छोड़ा है। चीन की नई क्षमता का एक बड़ा हिस्सा उत्तर और पश्चिम के क्षेत्रों जैसे शिंजियांग और इनर मंगोलिया से आ रहा है जहां लगभग 40% योजनागत प्रोजेक्ट्स केंद्रित हैं। अकेले 2024 में चीन ने 278 GW सोलर और 46 GW विंड एनर्जी जोड़ी है जो दुनिया के कई देशों की कुल उत्पादन क्षमता से भी अधिक है।

चीन ने केवल भूमि आधारित पवन और सौर परियोजनाओं में ही नहीं, बल्कि समुद्री पवन ऊर्जा (Offshore Wind Energy) में भी बड़ी छलांग लगाई है। 2018 तक जहाँ इसकी समुद्री पवन क्षमता 5 GW से भी कम थी वहीं मार्च 2025 तक यह बढ़कर 42.7 GW हो गई है। यह विश्व स्तर पर निर्माणाधीन ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट्स का आधे से अधिक हिस्सा है। Jiangsu और Guangdong जैसे तटीय प्रांतों में इन पवन टर्बाइनों को भारी उद्योग और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन से जोड़ा जा रहा है। हालांकि, 2021 में राष्ट्रीय सब्सिडी खत्म होने के बाद इस सेक्टर में थोड़ी गिरावट आई, लेकिन कई प्रांतों द्वारा दी गई लोकल इंसेंटिव्स के चलते इसमें फिर से ग्रोथ देखी जा रही है।

भविष्य की योजना में चीन केवल ऊर्जा उत्पादन ही नहीं बल्कि नई टेक्नोलॉजी को अपनाने पर भी जोर दे रहा है। फ्लोटिंग विंड टरबाइंस, टायफून-रेजिस्टेंट डिजाइंस, अंडरवाटर डेटा सेंटर और इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स को डायरेक्ट पावर देने जैसे प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं। चीन की ऑफशोर विंड पाइपलाइन फिलहाल 67 GW के आसपास है, जिसमें से 40% पहले से निर्माणाधीन है। ये पहलें यह दर्शाती हैं कि चीन न केवल वर्तमान में ग्रीन एनर्जी में अग्रणी है, बल्कि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को भी ध्यान में रखते हुए नवाचार कर रहा है। वर्तमान ट्रेंड्स को देखते हुए कहा जा सकता है कि चीन की यह रफ्तार न केवल उसे आत्मनिर्भर बनाएगी बल्कि ग्लोबल एनर्जी मैप को भी पूरी तरह से बदल देगी।

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