जहां न पहुंचे मजदूर वहां पहुंचा चीन का ड्रोन! चीन ने पहाड़ों पर लगाए सोलर फार्म, दुनिया देखती रह गई!

Durgesh Paptwan
Durgesh Paptwan | July 22, 2025

दुनिया में जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संकट को लेकर चर्चा जोरों पर है और इसी बीच चीन ने एक ऐसी अनोखी तकनीक अपनाई है जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। चीन अब उन पहाड़ों और दुर्गम इलाकों में भी सोलर पैनल लगा रहा है, जहां आज तक न मजदूर पहुंच सके और न ही भारी मशीनें। यह संभव हो पाया है केवल ड्रोन टेक्नोलॉजी के जरिए। चीन का यह कदम न केवल तकनीकी चमत्कार है बल्कि यह साफ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ी छलांग भी माना जा रहा है।

China installed solar plants using drones

ड्रोन से बदली पहाड़ों की तस्वीर

पहाड़ों और रेगिस्तानी इलाकों में सोलर पैनल लगाना हमेशा से चुनौतीपूर्ण काम रहा है। ऊबड़-खाबड़ जमीन, तेज हवाएं और पहुंच की कठिनाई के कारण यहां पारंपरिक तरीके अपनाना लगभग नामुमकिन होता है। लेकिन अब चीन ने इस समस्या का हल निकाल लिया है। ड्रोन पहले पूरे इलाके की मैपिंग करते हैं, फिर तय लोकेशन पर सोलर पैनल पहुंचाकर उन्हें इंस्टॉल भी कर देते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में न तो भारी मशीनों की जरूरत होती है और न ही इंसानी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। इससे न सिर्फ समय की बचत होती है, बल्कि लागत भी काफी कम आती है।

दुनिया का सबसे बड़ा सोलर निर्माता बना चीन

आज चीन न सिर्फ दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पैनल निर्माता बन गया है, बल्कि वह सबसे तेज़ गति से उन्हें इंस्टॉल भी कर रहा है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दुनिया के कुल सोलर पैनलों का 60% उत्पादन अकेले चीन ने किया। इसके अलावा, चीन का लक्ष्य है कि 2030 तक उसकी कुल ऊर्जा का 35% हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से आए। यह रणनीति चीन को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बना रही है और साथ ही पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद साबित हो रही है।

टेक्नोलॉजी और एआई ने बढ़ाई रफ्तार

ड्रोन के साथ-साथ चीन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी भरपूर इस्तेमाल किया है। AI के ज़रिए सटीक प्लानिंग, स्थान चयन और इंस्टॉलेशन प्रोसेस को और तेज़ और स्मार्ट बना दिया गया है। इन दोनों तकनीकों के मेल से अब ऐसे इलाकों में भी सोलर फार्म लग रहे हैं, जहां पहले सिर्फ बंजर जमीन नजर आती थी। शांक्सी, गांसू, सिचुआन और इनर मंगोलिया जैसे राज्यों में यह प्रोजेक्ट्स तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 5 सालों में इस तकनीक से सोलर इंस्टॉलेशन की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी।

भारत और दुनिया को लेनी चाहिए प्रेरणा

भारत, अमेरिका और यूरोप जैसे देश भी नवीकरणीय ऊर्जा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, लेकिन जिस तरह से चीन ने टेक्नोलॉजी, स्केल और स्पीड के साथ काम किया है, वह सराहनीय है। भारत जैसे देश, जहां लद्दाख, अरुणाचल और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य हैं वहां इस मॉडल को अपनाया जा सकता है। इससे न केवल बिजली उत्पादन बढ़ेगा बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी लाभ मिलेगा। चीन का यह कदम साबित करता है कि अगर सही तकनीक और सोच हो, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती है।

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